हर रोज़ सुनातें हैं वो मुझे मेरे देश का हाल ,
और हर रोज़ सुन लेता हूँ मै,
काश के सुनता मै हर रोज़ एक अच्छी ख़बर ,
मगर हर बार बुरी ख़बर सुनकर डर जाता हूँ मै ,
बंद कर देता हूँ बुरी ख़बर सुनकर उस पर्दे को,
और आराम से अपने बिस्तर पर सो जाता हूँ मै ,
नही है मुझको उस बात का अहसास ,
नही बीती है शायद मुझ पर वो आखरी रात,
कितने प्यार से उस बुरी ख़बर को सुनाकर वो चले जाते है,
जिस बात को सुनकर मै डर जाता हूँ ,
वो उस बात को बोलने का पैसा कमाते है,
प्रष्न पूछते है उस अधमरे इंसान से,
जो बन गया है ख़ुद प्रष्न अपनी जिंदगी में अब,
ना होते अपने तन पे कपड़े तो पता चलता,
खीचतें है गरीबों की नग्न तस्वीरें अपने घर को सजानें के लिए !
मंगलवार, 25 अगस्त 2009
मेरे apne
मै नहीं जानता कौन सा है मेरा धर्म ,
पर मेरे अपने मुझे बता देते है,
मै चाहता हूँ अपने ढंग से जीना,
पर वो अपने ढंग से जीना सिखा देते है !
पर मेरे अपने मुझे बता देते है,
मै चाहता हूँ अपने ढंग से जीना,
पर वो अपने ढंग से जीना सिखा देते है !
चाहत
वो चाहता तो था
ज़िन्दगी में अपनी कुछ करना
मगर ख़ुद को ही समझ पाया ना आज तक ,
वो चाहता तो था
प्यार उनसे करना
मगर ख़ुद को ही प्यार ना कर पाया आज तक ,
वो चाहता तो था
बहुत दूर तक जाना
मगर ख़ुद अपने पास ना आ पाया आज तक,
ज़िन्दगी की हर दौड़ में जीतता रहा
मगर ख़ुद से ही जीत पाया ना आज तक !
ज़िन्दगी में अपनी कुछ करना
मगर ख़ुद को ही समझ पाया ना आज तक ,
वो चाहता तो था
प्यार उनसे करना
मगर ख़ुद को ही प्यार ना कर पाया आज तक ,
वो चाहता तो था
बहुत दूर तक जाना
मगर ख़ुद अपने पास ना आ पाया आज तक,
ज़िन्दगी की हर दौड़ में जीतता रहा
मगर ख़ुद से ही जीत पाया ना आज तक !
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