मंगलवार, 25 अगस्त 2009

चाहत

वो चाहता तो था
ज़िन्दगी में अपनी कुछ करना
मगर ख़ुद को ही समझ पाया ना आज तक ,
वो चाहता तो था
प्यार उनसे करना
मगर ख़ुद को ही प्यार ना कर पाया आज तक ,
वो चाहता तो था
बहुत दूर तक जाना
मगर ख़ुद अपने पास ना आ पाया आज तक,
ज़िन्दगी की हर दौड़ में जीतता रहा
मगर ख़ुद से ही जीत पाया ना आज तक !

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