कितना बुरा होता है
इस ट्रेन का इंतज़ार
पहले तो घर से निकलने कि जल्दी
ऊपर से ट्रेन के छूट जाने का डर
पहुच जाता हूँ जल्दी जल्दी में
मै वक़्त से पहले
और गहरी साँस लेता हूँ
अपनी घड़ी को तकता हूँ
अभी कुछ वक़्त है बाकी
नहीं निकला मेरा साथी
फिर होती है पूछताछ
कहाँ पे है मेरा संगी , कहाँ पे है मेरा साथी
पता चलता है फिर मुझको
उसे तो देर है बहुत
मै अपने वक़्त से पहले
वो अपने वक़्त से देर है बहुत
किस तरहं होता है है मेरे वक़्त का तिरस्कार
और कितना बुरा होता है इस ट्रेन का इंतज़ार
फिर होती है वहां से
वक़्त बिताने कि शुरुआत
और दिखते है मुझको
चलते फिरते नये नये किरदार
किसी को जल्दी है बहुत
तो कोई लेट हो गया
कोई है खिलखिला यहाँ
कोई मायूस हो गया
किसी का आने वाला है कोई
किसी का जाने वाला है
मै देखता हूँ हर चेहरा
मुझे अपना सा लगता है
मेरी ज़िन्दगी के हर पहलू मुझे आते है नज़र
मै खुद को याद करता हूँ
फिर उनको देखता हूँ मै
कभी मुझे भी जल्दी थी
कभी तो मै भी लेट था
कभी मायूस भी था मै
कभी खिलखिला भी था
मेरा भी कोई आया था कभी
कोई गया भी था
ये चेहरे है अलग अलग
मुझे अपने से लगते है
ये चलते फिरते
मुझे मेरे ही किरदार लगते है !