हर रोज़ सुनातें हैं वो मुझे मेरे देश का हाल ,
और हर रोज़ सुन लेता हूँ मै,
काश के सुनता मै हर रोज़ एक अच्छी ख़बर ,
मगर हर बार बुरी ख़बर सुनकर डर जाता हूँ मै ,
बंद कर देता हूँ बुरी ख़बर सुनकर उस पर्दे को,
और आराम से अपने बिस्तर पर सो जाता हूँ मै ,
नही है मुझको उस बात का अहसास ,
नही बीती है शायद मुझ पर वो आखरी रात,
कितने प्यार से उस बुरी ख़बर को सुनाकर वो चले जाते है,
जिस बात को सुनकर मै डर जाता हूँ ,
वो उस बात को बोलने का पैसा कमाते है,
प्रष्न पूछते है उस अधमरे इंसान से,
जो बन गया है ख़ुद प्रष्न अपनी जिंदगी में अब,
ना होते अपने तन पे कपड़े तो पता चलता,
खीचतें है गरीबों की नग्न तस्वीरें अपने घर को सजानें के लिए !
6 टिप्पणियां:
आपका हिन्दी चिट्ठाजगत में हार्दिक स्वागत है. आपके नियमित लेखन के लिए अनेक शुभकामनाऐं.
एक निवेदन:
कृप्या वर्ड वेरीफीकेशन हटा लें ताकि टिप्पणी देने में सहूलियत हो. मात्र एक निवेदन है बाकि आपकी इच्छा.
वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?> इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये!!.
व्यथा की सुंदर अभिव्यक्ति
kadva sach.narayan narayan
बहुत सुन्दर और सामयिक अभिव्यक्ति. साधुवाद.
Bahut Barhia... aapka swagat hai... isi tarah likhte rahiye
Please Visit:-
http://hellomithilaa.blogspot.com
Mithilak Gap...Maithili Me
http://mastgaane.blogspot.com
Manpasand Gaane
http://muskuraahat.blogspot.com
Aapke Bheje Photo
ब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है. आपको पढ़कर बहुत अच्छा लगा. सार्थक लेखन हेतु शुभकामनाएं. जारी रहें.
---
Till 25-09-09 लेखक / लेखिका के रूप में ज्वाइन [उल्टा तीर] - होने वाली एक क्रान्ति!
एक टिप्पणी भेजें