सोमवार, 28 जून 2010

Ashk to ashk hai

अश्क तो अश्क है बहते जायेंगे
प्यार को जनमों ना समझ पायेंगे
मैंने भी तो प्यार उस दिल से किया
जो न मेरे ही कभी बन पायेंगे
सोचता था मै ही उनको छोड़ दूँ
जानता था वो मुझे ठुकरायेंगे
एक ही दिन में बदला मेरा नसीब
छोड़ गये वो तोड़ गये रिश्ते सारे
वो इंतज़ार
मिलने की प्यास
रातों की बात
जानते है हम ना कुछ कर पायेंगे
जानते है हम ना कुछ कर पायेंगे

Meri taash ke bawan patte

मेरी ताश के बावन पत्ते
रूप तो अलग अलग
फिर भी लगते एक से है
एक तरफ के रूप भी और रंग भी तो एक से है
दूजी तरफ के सरे पत्ते
देखो तो अनेक से है
एक तरफ से धर्म और जात के झंडे गड़े है
दूजी तरफ से खून के भी रंग सबके एक से है

Anmool moti

जिसको सुख की ना चिंता
ना दुःख की फिकर
जिसको चिंता है
हँसती रहूँ हर डगर
जिसके ज़ख्मो को भरती है उसकी हँसी
दूसरों की खरोचों पे वो रो पड़ी
वो जो रोये तो आंसू भी रोने लगें 
अपनी पलकों को खुद ही भिगोने लगें
जब ज़रुरत हो मोती की रब को कभी
अपने दिल को वो दुश्मन बना लेता है
बेवजह ही वो उसको रुला देता है