सोमवार, 28 जून 2010

Anmool moti

जिसको सुख की ना चिंता
ना दुःख की फिकर
जिसको चिंता है
हँसती रहूँ हर डगर
जिसके ज़ख्मो को भरती है उसकी हँसी
दूसरों की खरोचों पे वो रो पड़ी
वो जो रोये तो आंसू भी रोने लगें 
अपनी पलकों को खुद ही भिगोने लगें
जब ज़रुरत हो मोती की रब को कभी
अपने दिल को वो दुश्मन बना लेता है
बेवजह ही वो उसको रुला देता है

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