जिसको सुख की ना चिंता
ना दुःख की फिकर
जिसको चिंता है
हँसती रहूँ हर डगर
जिसके ज़ख्मो को भरती है उसकी हँसी
दूसरों की खरोचों पे वो रो पड़ी
वो जो रोये तो आंसू भी रोने लगें
अपनी पलकों को खुद ही भिगोने लगें
जब ज़रुरत हो मोती की रब को कभी
अपने दिल को वो दुश्मन बना लेता है
बेवजह ही वो उसको रुला देता है
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