शनिवार, 16 अक्टूबर 2010

Seekha Liya Hai

दिल की बातें दिल में रखना सीख लिया है
मैंने भी अब तुझको पढना सीख लिया है
तुझको भी तो होता होगा दर्द कभी तो
अपने दिल को ये समझाना सीख लिया है
कैसे भूलूं बीती बातें
कैसे भूलू जागी रातें
काँटों सी क्यों अब चुभती हैं
तुझको मेरी सारी बातें
अब बीतीं बातों से तुझको दूर भागना सीख लिया है
मैंने भी अब तुझको पढना सीख लिया है
दिल की बातें दिल में रखना सीख लिया है
बस कुछ दिन की बात है अब तो
बस कुछ पल का साथ है अब तो
मै भी जानू
तुम न बोलो
तेरे मुह इन बातों को सुन कर कितना दर्द हुआ है
दिल की बातें दिल में रखना सीख लिया है
मैंने भी अब तुझको पढना सीख लिया है
अब वो दिन न लौट के आयें
दिल के दर्द को  और बढ़ाएं
काटों को अब फूल समझकर
हाथों में दबाना सीख लिया है
मैंने भी अब तुझको पढना सीख लिया है
दिल की बातें दिल में रखना सीख लिया है
मेरे प्यार को थप्पड़ समझो
या बातों को काटें
रातों को मै अब रोता हूँ
सोच के तेरी बातें
अपने दिल के सब रिश्तों से
धोखा खाना सीख लिया है
मैंने भी अब तुझको पढना सीख लिया है
दिल की बातें दिल मैं दिल में रखना सीख लिया है

2 टिप्‍पणियां:

Aish ने कहा…

Kya Baat Hai... Bahot Sunder Hei...

Aish....

Aish ने कहा…

Kya Khub Likha hai...

Aish....