शनिवार, 4 दिसंबर 2010

shaadi ka laddu

शादी वो लड्डू है प्यारे
जो खाए वो पछताए , जो ना खाए वो पछताए
शादी से पहले जिसे कहते रहे जानू जानू
शादी के बाद वही जान पर बन आये

प्यारे शादी वो लड्डू है 
जो खाए वो पछताए , जो ना खाए वो पछताए 

हो ही गया शादी के बाद एक दिन तो पंगा
कर ही दिया यारों हमने भी पूरी तरहं दंगा
सोचा जो होगा देखा जायेगा
पछताना था जितना पछता लिया
अब पूरी ज़िन्दगी कौन पछतायेगा

देखा कर गुस्से को मेरे बन गयी वो भी दबंग
और छिड गई आपस में एक भरी भरकम जंग
बोली हमसे मुझे अभी चाहिए तुमसे तलाक
अपनी ख़ुशी को अन्दर दबाकर हमने भी दिया ताव
और दिल खोल कर बोला तलाक तलाक तलाक
पता नहीं किस तरहं मेरी ख़ुशी को वो ताड़ गई
दे मारे मुह पर उसने मेरे पटाक पटाक पटाक

कडवे  घूट पीकर अब तक हैं दिन बिताये
शादी के लड्डू में साफ़ी के मज़े पाए
प्यारे शादी वो लड्डू है
जो खाए वो पछताए , जो ना खाए वो पछताए 

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