Intzaar or kitna
एक घबराहट सी ना जाने कैसी दिल में फूट रही,
ना जाने हर वक़्त क्यों मुझको मेरी सांसें ढूंड रही !जैसे कोई चिल्लाहट कानों में पल पल गूंजे है ,और सीने में दिल की धड़कन चिटक चिटक कर टूट रही !जैसे इन आँखों ने कोई ख्वाब बुरा सा देख लिया ,और आँखों में आंसू की कई गहरी नदियाँ सूख गई!
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