सोमवार, 1 अक्टूबर 2012

Koun Karta Hai Mna

कौन करता है मना
छोड़ दो ये सारे बंधन 
तोड़ दो ये सारे  रिश्ते 
झूठ का व्यापार 
सच का अत्याचार 
कौन करता है मना !
ज़िन्दगी तो वैसे भी आसूओं  की  झील है 
 डूब कर जीना ही  अपनी ज़िन्दगी की रीत है 
फिर क्यों तड़पते हो 
क्यों मचलते हो 
कर  डालो जो कहता है दिल 
कौन करता है मना !
कैसी ये बातें 
कैसी मुलाकातें 
झूठी है रस्में, झूठे है ये नातें 
जी लो जैसे जीना है
कर लो जो कहता है दिल तुम्हारा 
कौन करता है मना !

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