मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

kal

कल कल में न मिला प्यार हमारा हमको
कल कल के लिए हम कल को खो बैठे
आये थे कितने कल 
और आज बनकर चल दिए 
पर हम तो अपने कल पर 
आज भी अटल हैं 
चाहा था उन्हें कल 
बोलेंगें उन्हें कल 
पर अब तो क्या बताएं 
ना हमने कही बात 
ना वो ही हमसे बोले 
हम  आज सोचते हैं 
वो बीते कल कि बातें 
कल फिर वही सोचेंगे
जो आज सोचते हैं 

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