बुधवार, 29 सितंबर 2010

Dil ke ghere mein

मुझको मुझसे काम बहुत है 
लेकिन ये दिल जाम बहुत है 
कोई इसको भी समझाए
साला ये हराम बहुत है 
कैसे जीलूं सारा जीवन 
वक़्त है कम और काम बहुत है 
पीकर कैसे सब कुछ बोलूं 
नशा है कम और बात बहुत है 
कठिन है जीना  सारा जीवन 
मरना तो आसान बहुत है 
छोड़ो भी अब ग़म की बातें 
ग़म ना मुझको छोड़ेगा 
ख़ुशी को पाना थोडा मुश्किल 
खुश रहना आसान बहुत है 

1 टिप्पणी:

Alia ने कहा…

kya baat hai!

Alia Ahmed Dalwai
http://aliascreativelife.blogspot.com/