पर मिला क्या ज़िन्दगी से
कुछ भी नहीं,
मुझको जीने के लिए
ज़रुरत थी ताज़ा हवा कि
ढूंड आया बाज़ार सारे
पर मिला क्या
कुछ भी नहीं ,
मैंने भी मांगी खुदा से
दर पे जाकर ये दुआ
मुझको भी झोली में देदे
तू ख़ुशी के चार दिन
हा हा हा ..........
पर मिला क्या
कुछ भी नहीं
1 टिप्पणी:
kuch bhi nahi
ज़िन्दगी को हँस के मै जीने चला था
पर मिला क्या ज़िन्दगी से
कुछ भी नहीं,
मुझको जीने के लिए
ज़रुरत थी ताज़ा हवा कि
ढूंड आया बाज़ार सारे
पर मिला क्या
कुछ भी नहीं ,
मैंने भी मांगी खुदा से
दर पे जाकर ये दुआ
मुझको भी झोली में देदे
तू ख़ुशी के चार दिन
हा हा हा ..........
पर मिला क्या
कुछ भी नहीं
Jindagi ne jab bhi hame hasana sikhaya..
Takdir ne aake hame dhokha de diya...
Hum fulo par rah bichana chahate the..
par hume sirf kanto ki rah mili..
Hamari hansi pe mat jana.. ye to ek dhokha he...
aansuo ko hamne is kadar samet liya he..
Ki aaj hame rone se bhi dar lagata he...
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