शनिवार, 4 दिसंबर 2010

shaadi ka laddu

शादी वो लड्डू है प्यारे
जो खाए वो पछताए , जो ना खाए वो पछताए
शादी से पहले जिसे कहते रहे जानू जानू
शादी के बाद वही जान पर बन आये

प्यारे शादी वो लड्डू है 
जो खाए वो पछताए , जो ना खाए वो पछताए 

हो ही गया शादी के बाद एक दिन तो पंगा
कर ही दिया यारों हमने भी पूरी तरहं दंगा
सोचा जो होगा देखा जायेगा
पछताना था जितना पछता लिया
अब पूरी ज़िन्दगी कौन पछतायेगा

देखा कर गुस्से को मेरे बन गयी वो भी दबंग
और छिड गई आपस में एक भरी भरकम जंग
बोली हमसे मुझे अभी चाहिए तुमसे तलाक
अपनी ख़ुशी को अन्दर दबाकर हमने भी दिया ताव
और दिल खोल कर बोला तलाक तलाक तलाक
पता नहीं किस तरहं मेरी ख़ुशी को वो ताड़ गई
दे मारे मुह पर उसने मेरे पटाक पटाक पटाक

कडवे  घूट पीकर अब तक हैं दिन बिताये
शादी के लड्डू में साफ़ी के मज़े पाए
प्यारे शादी वो लड्डू है
जो खाए वो पछताए , जो ना खाए वो पछताए 

शनिवार, 16 अक्टूबर 2010

Seekha Liya Hai

दिल की बातें दिल में रखना सीख लिया है
मैंने भी अब तुझको पढना सीख लिया है
तुझको भी तो होता होगा दर्द कभी तो
अपने दिल को ये समझाना सीख लिया है
कैसे भूलूं बीती बातें
कैसे भूलू जागी रातें
काँटों सी क्यों अब चुभती हैं
तुझको मेरी सारी बातें
अब बीतीं बातों से तुझको दूर भागना सीख लिया है
मैंने भी अब तुझको पढना सीख लिया है
दिल की बातें दिल में रखना सीख लिया है
बस कुछ दिन की बात है अब तो
बस कुछ पल का साथ है अब तो
मै भी जानू
तुम न बोलो
तेरे मुह इन बातों को सुन कर कितना दर्द हुआ है
दिल की बातें दिल में रखना सीख लिया है
मैंने भी अब तुझको पढना सीख लिया है
अब वो दिन न लौट के आयें
दिल के दर्द को  और बढ़ाएं
काटों को अब फूल समझकर
हाथों में दबाना सीख लिया है
मैंने भी अब तुझको पढना सीख लिया है
दिल की बातें दिल में रखना सीख लिया है
मेरे प्यार को थप्पड़ समझो
या बातों को काटें
रातों को मै अब रोता हूँ
सोच के तेरी बातें
अपने दिल के सब रिश्तों से
धोखा खाना सीख लिया है
मैंने भी अब तुझको पढना सीख लिया है
दिल की बातें दिल मैं दिल में रखना सीख लिया है

बुधवार, 29 सितंबर 2010

Dil ke ghere mein

मुझको मुझसे काम बहुत है 
लेकिन ये दिल जाम बहुत है 
कोई इसको भी समझाए
साला ये हराम बहुत है 
कैसे जीलूं सारा जीवन 
वक़्त है कम और काम बहुत है 
पीकर कैसे सब कुछ बोलूं 
नशा है कम और बात बहुत है 
कठिन है जीना  सारा जीवन 
मरना तो आसान बहुत है 
छोड़ो भी अब ग़म की बातें 
ग़म ना मुझको छोड़ेगा 
ख़ुशी को पाना थोडा मुश्किल 
खुश रहना आसान बहुत है 

सोमवार, 28 जून 2010

Ashk to ashk hai

अश्क तो अश्क है बहते जायेंगे
प्यार को जनमों ना समझ पायेंगे
मैंने भी तो प्यार उस दिल से किया
जो न मेरे ही कभी बन पायेंगे
सोचता था मै ही उनको छोड़ दूँ
जानता था वो मुझे ठुकरायेंगे
एक ही दिन में बदला मेरा नसीब
छोड़ गये वो तोड़ गये रिश्ते सारे
वो इंतज़ार
मिलने की प्यास
रातों की बात
जानते है हम ना कुछ कर पायेंगे
जानते है हम ना कुछ कर पायेंगे

Meri taash ke bawan patte

मेरी ताश के बावन पत्ते
रूप तो अलग अलग
फिर भी लगते एक से है
एक तरफ के रूप भी और रंग भी तो एक से है
दूजी तरफ के सरे पत्ते
देखो तो अनेक से है
एक तरफ से धर्म और जात के झंडे गड़े है
दूजी तरफ से खून के भी रंग सबके एक से है

Anmool moti

जिसको सुख की ना चिंता
ना दुःख की फिकर
जिसको चिंता है
हँसती रहूँ हर डगर
जिसके ज़ख्मो को भरती है उसकी हँसी
दूसरों की खरोचों पे वो रो पड़ी
वो जो रोये तो आंसू भी रोने लगें 
अपनी पलकों को खुद ही भिगोने लगें
जब ज़रुरत हो मोती की रब को कभी
अपने दिल को वो दुश्मन बना लेता है
बेवजह ही वो उसको रुला देता है

मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

meri chahat


पलकों को खोलूं तो 
मन को टटोलूं तो
दिन के उजाले में, हर वक़्त अँधेरा है
चंदा की चांदनी है, तारों का घेरा है
चकोर की चाहत में मौत का बसेरा है
मेरी भी चाहत का प्यार मुझको मिल जाये 
वर्ना इस दिल कि ना धड़कन ना चेहरा है 
मेरी भी चाहत की मौत अगर मंजिल है
परवाह नहीं मुझको, मौत मेरी साहिल है
एक बार आकर वो झूट भी ये कह दे कि
सीनें में उसके जो हर वक़्त धड़कता है
धड़कन वो मेरी है वो दिल भी मेरा है 

kal

कल कल में न मिला प्यार हमारा हमको
कल कल के लिए हम कल को खो बैठे
आये थे कितने कल 
और आज बनकर चल दिए 
पर हम तो अपने कल पर 
आज भी अटल हैं 
चाहा था उन्हें कल 
बोलेंगें उन्हें कल 
पर अब तो क्या बताएं 
ना हमने कही बात 
ना वो ही हमसे बोले 
हम  आज सोचते हैं 
वो बीते कल कि बातें 
कल फिर वही सोचेंगे
जो आज सोचते हैं 

gham

जीना हो गर यार मेरे
तो ग़म की क्यों हम बात करें 
उस चीज़ को तुम अपनालो 
हर ग़म को ख़ुशी बनालो 
ख़ुशी तो है मेहमान मेरी 
ग़म तो मेरा अपना है 
वो आती है  चली जाती है 
ये साथ मेरे ही रहता है 
ग़म को छोड़ कर 
हम ख़ुशी के पीछे क्यों भागें 
कल फिर से उस ख़ुशी को 
ग़म में बदल जाना है 

zra mushkil

समझाना आसान है
समझना ज़रा मुश्किल
कहना आसान है
करना ज़रा मुश्किल
पाना आसान है
संभालना ज़रा मुश्किल
इस मुश्किल सी दुनिया में
सिर्फ अपने नज़रिए से
दूसरों के लिए हर चीज़ आसान है
पर अपने लिए ज़रा मुश्किल

kuch bhi nahi

ज़िन्दगी को हँस के मै जीने चला था 
पर मिला क्या ज़िन्दगी से 
कुछ भी नहीं, 
मुझको जीने के लिए 
ज़रुरत थी ताज़ा हवा कि 
ढूंड आया बाज़ार सारे 
पर मिला क्या 
कुछ भी नहीं ,
मैंने भी मांगी खुदा से 
दर पे जाकर ये दुआ 
मुझको भी झोली में देदे 
तू ख़ुशी के चार दिन 
हा हा हा ..........
पर मिला क्या 
कुछ भी नहीं 

रविवार, 31 जनवरी 2010

Ujala

हज़ारों चिराग जले
उजाला फिर भी न रहा
वहां अँधेरा है ,
फिर भी रौशनी क्यों है
मेरे घर के आँगन में
ठंडी हवा तो चलती है
फिर भी इस ज़हन में मेरे
इतनी तपिश सी क्यों है
नींद तो सब लेते है
कि कुछ आराम मिले
उठता हूँ सो कर
तो थक जथा हूँ मै