झूठ ही मेरा जीवन है ,झूठ मेरा संसार है
झूठ ही मेरे अन्दर है ,झूठ ही मेरे बाहर है
छीन लिया गर झूठ को मुझसे
जी ही नहीं मै पाऊंगा
बना चुका हूँ अपना जीवन
बिन इसके मर जाऊंगा
गर सोचूं ये झूठ है क्या
अंहकार का नाम है
सच तो सचमुच कड़वा है
झूठ ही मीठा पान है
हर दुःख से बच जाता हूँ
झूठ जहाँ ले आता हूँ
बना लिया है झूठ को जीवन
समझ नहीं मै पता हूँ
समझ नहीं मै पता हूँ
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