साथ तो रहे वो, बरसों से हमारे
उसने भी हमको परखा
हमने भी उनको परखा
शिकवे हमे भी कुछ थे
थे उनको कुछ गिले भी
न हमने सुनी उनकी
न उसने हमने पूछा
पर एक दिन अचानक वो छोड़ गये हमको
कहता था कोई हमसे
वो परेशां बहुत है
जो बरसों साथ में थे
थे इतने गिले शिकवे
दूर हो के हमसे
वो पास भी न आये
हम कैसे मान जाएं
वो परेशां बहुत है
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