जबां क्या कहती है
ये तो दिल ही जानता है
दिमाग क्या सोचता है
ये भी दिल ही जानता है
दिल और दिमाग में
फर्क है सिर्फ दो फांसलों का
फिर क्यों सोच में
ज़मीं आसमां का फर्क होता है
बुरा करता हूँ तो कोई कदम
दिल से नहीं उठता
भला करने को ये दिल
हर तरह तैयार रहता है
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