क्यों लगता है ऐसा मुझको
सब कुछ खो दिया मैंने
जिसे पा कर ही पैदा हुआ
कभी खोया नहीं मैंने
जिसे चाह कर भी कभी
खो नहीं सकता हूँ मै
जिसे खोने के लिए
कोई उपाए ही नहीं है
ख़ुशी जो लेके आया था
जो हर दम साथ मेरे है
वो तो मेरे ही अन्दर है
बाहर क्यों ढूँढता उसको
पर अब तो लगता है ऐसा
मुझे दुःख की ज़रुरत है
उसी को पास रखता हूँ
उसी के साथ रहता हूँ
उसी से भागता हूँ मै
ख़ुशी को ढूँढता हूँ मै
ख़ुशी को ढूँढने में दिन ब् दिन
दुःख पा लिए मैंने
ख़ुशी तो साथ मेरे थी
दुःख अपना लिए मैंने
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें