शुक्रवार, 25 सितंबर 2009

yadeen

यादें तो कुछ ऐसी है
हर मौसम के जैसी है
कभी देती है दर्द
तो कभी बरस पड़ती है आँखों से
कभी देती है तपिश
तो सहम जाता हूँ मै
कभी पतझड़ के पत्तों की  तरह
बिखर जाती है सीने में
ये यादें आती  ही क्यों है
दर्द ये दिल का बढाती क्यों है
आग सीने में लगाती क्यों है
मेरे भूले से भी न भूलें है
मेरे अश्कों को बढाती क्यों है
कभी सताती है
कभी रुलाती है
कभी चेहरे पर मुस्कुराहट ले आती है
दर्द और ख़ुशी का अहसास दिलाती है
यादें तो कुछ ऐसी है
हर मौसम के जैसी है

1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

college ka romance yaad aa gaya yaar... very good...